सेक्स और तनाव: आपसी जुड़ाव और प्रभाव
सेक्स और तनाव—ये दोनों इंसान की ज़िंदगी में एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। अक्सर लोग इन्हें अलग-अलग समझते हैं, लेकिन हकीकत में इनका सीधा असर मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर पड़ता है। आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में यह रिश्ता और भी जटिल हो गया है। सेक्स एक प्राकृतिक मानवीय ज़रूरत है , जो केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक जुड़ाव से भी जुड़ी होती है। जब इंसान सुरक्षित, समझा हुआ और सम्मानित महसूस करता है, तो उसका मानसिक संतुलन बेहतर रहता है। लेकिन जब सेक्स को लेकर भ्रम, डर, शर्म या सामाजिक दबाव होता है, तो यही चीज़ तनाव का कारण बन सकती है। समाज में इस विषय पर खुलकर बात न होने के कारण लोग सही जानकारी के बजाय अफवाहों पर भरोसा कर लेते हैं। तनाव आज हर किसी की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। करियर की चिंता, आर्थिक दबाव, रिश्तों की उलझनें और सामाजिक अपेक्षाएँ—ये सभी तनाव को बढ़ाते हैं। जब तनाव बढ़ता है, तो उसका असर शरीर और मन दोनों पर पड़ता है। कई बार लोग चिड़चिड़े हो जाते हैं, नींद खराब हो जाती है और भावनात्मक दूरी बढ़ने लगती है। ऐसे में सेक्स से जुड़ी इच्छाएँ या तो कम हो जाती हैं या फिर...